July 13, 2010

Its My "Mistake" ....

Part 1 - 28th June, 2010


“हाँ, मैं टिकट ले रहा हूँ, अभी सीट खली है मिल जायेगा” (मैंने फोन पर पापा से कहा)

“वैसे कब की टिकट मिल रही है”

13th July की, उनका इंडक्शन 16th को है न?”

“हाँ, किसी ऐसी ट्रेन मैं लेना जो यहाँ से सीधे वहाँ पहुंचे”

“गरीब-रथ में खाली है, और ट्रेन भी अच्छी है, ले लूँ?”

“ठीक से देख कर ले लो”

(फिर मैंने फोन रख दिया)

थोड़ी देर इंडियन रेलवे की वेबसाइट पर इधर-उधर करने के बाद टिकट मिल गया! मैंने पाप को फोन किया और टिकट मिल जाने की बात कही!

“ट्रेन यहाँ से कितने बजे है?”

“रात के साढ़े बारह बजे”

“ठीक है, 13th को ना?”

“हाँ”

(फिर मैंने फोन रख दिया)


Part 2 - 12th July 2010

मेरे फोन की एयरटेल टोने ने मेरी नींद में दखल दिया! मैंने स्क्रीन पर आ रहे नाम को देखा! पापा फोन कर रहे थें! मैंने जैसे तैसे होश संभाला और फोन का ग्रीन बटन दबाया!

“हेलो”

 “हाँ, बोलिए!”

“अभी तक सोये हुए हो?”

“हाँ, कल रात काफी देर से सोया” (मैंने अनमने ढंग से जवाब दिया)

“ठीक है, उठो तो फोन करो मुझे” (पापा समझ गए, मैं नींद मैं हूँ)

“ठीक है, मैं करता हूँ”

फोन रखने के 20 min. बाद मैं उठा, और फिर सबसे पहले मेसेज देखे! फिर पापा का नंबर डायल किया! इसी बीच में मैंने लैपटॉप ऑन किया! और इन्टरनेट चालू होने का इंतज़ार कर रहा था!

“हेलो”

“हाँ, बोलिए”

“तुमने टिकट अभी तक मेल नहीं किया है क्या”

“नहीं, अभी थोड़ी देर मैं करता हूँ”

“जल्दी करो मैं होल्ड करता हूँ”

“नेट शुरू नहीं ही हो रहा है” (नेट में कुछ प्रॉब्लम था), मैं जैसे ही नेट चालू होता है आपको मेल करता हूँ”

“ठीक है, जल्दी करो, मैं ऑफिस में चार बजे तक ही हूँ”

“ठीक है”

इतना कह कर मैंने फोन रख दिया, मैं नेट कंनेक्ट होने का इन्तेजार कर रहा था! करीब तीन बज 
गए, नेट कंनेक्ट नहीं हो पाया! इस बीच पापा ३ बार और फोन कर चुके थें!

“अभी तक नहीं भेजा?’

“नहीं, क्न्नेक्ट नहीं हो रहा”

“अच्छा अपना पासवर्ड दो, मैं यहाँ से निकाल लेता हूँ!”

“मैं आपको रात तक मेल करता हूँ कल आप सुबह टिकट ले लीजियेगा, ट्रेन तो रात में है ना”

“ठीक है, जैसा बोलो”

“हाँ, कल सुबह घर से ही निकाल लीजियेगा”

“ठीक है, तुम भेज देना”

“हाँ, पक्का! नेट चालू होते ही भेजता हूँ”

नेट चालू नहीं हुआ, शाम के करीब ५ बजे के आस पास में जब नेट चालू हुआ तो मुझे किसी जरूरी काम से बाहर जाना पड़ा! मैंने सोंचा रात को मेल कर देता हूँ!


Part 3 – 13th July 00:30 hrs

रात के करीब साढ़े 12 बजे, मैंने टिकट मेल करने की सोंची! मैंने अपना इंडियन रेलवे का अकाउंट 
log-in किया, और टिकेट कॉपी करके मेल करने लगा! तभी मैंने ट्रेन की departure time देखी! एक पल के लिए मानो मेरे होश ही उड़ गए!

मैंने हडबड में पापा को फोन किया!

“ट्रेन तो आज रात की ही है”

“क्या बात कर रहे हो” (पापा नींद में ही हडबडाकर बोले)

“हाँ, dep. Time 12.34 रात का है! मतलब ट्रेन 13th को तो है, पर आज ही रात में”

थोड़ी देर के लिए जैसे सब कुछ रुका सा गया हो! मुझे समझ नहीं आ रहा थाम कि मैं क्या करूँ! बस, चुप-चाप अब डाट सुनने L का इंतज़ार कर रहा था! और अगले ही पल ....

“मैंने बोला था तुम्हे, मुझे मेल कर दो, पर तुम तो ....” (पापा मुझपर ....) L

“मुझे बिलकुल नहीं .... (मुझे अपनी इतनी बड़ी गलती का एहसास था, पर मैं अब चाह के भी कुछ नहीं कर सकता था” L

“हाँ, अब कर भी क्या सकते हैं, अगर जब मैंने बोला था तो भी मेल कर देते तो शायद .... (पापा गुस्से में बोले)” L

“मैं चुप-चाप डाट सुनते रहा, मैं अब कर भी क्या सकता था .... (मुझे अपनी गलती का एहसास था .... )  L

जिंदगी में हमसे, कभी-कभी अनजाने में कुछ ऐसा हो जाता है, जिसके लिए हम चाह के भी कुछ नहीं कर पातें! पर, हाँ! उनसे जो सिखने को मिलता है, वो हम कभी नहीं भूलते!
pratik' 

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